Sunday, September 9, 2018

परम पूज्य स्वामी श्री सच्चिदानंद जी महाराज का नए विरक्त साधकों के लिए संदेश

           ओम श्री सत गुरुदेव भगवान की जय
                   ओम श्री परमात्मने नमः

हरी ॐ,     
      बड़ा भारी पुण्य इकट्ठा हुआ कि आप सभी नये साधको को संसार के मायिक जंजाल से निकाल लिया है बचा लाया यह पुण्य जब आप यहां से पुनः माया के तरफ चले जाएँगे तो बुरे फँस जाएंगे उसी माया के दल दल में, पुण्य  चले जाएंगे तो आप फिर उसी माया माया के दलदल में पहुंच जाएंगे तो अब आप आ गए हैं यहां आश्रम में इतना आनंद कहीं संसार में है अपने से खाना मिल जाता है दूसरे आश्रमों में जाओगे तो भिक्षाटन करके लाना पड़ेगा
, मांगना पड़ेगा कहीं काम करना पड़ेगा , नौकरी किसी की सेवा करनी पड़ेगी तब कुछ दो रोटी मिलेगी यहां आप लोगों को क्या कुछ करना पड़ता है यहां तो बस आश्रम कि केवल सेवा है कुत्ता भी पूछ से झाड़ू लगा लेता है |तब बैठता है इतनी सेवा कोई सेवा है,
जो आश्रम चला रहे हैं बाबा लोग जो व्यवस्था देख रहे हैं,, वह जो कहे उनका आदेश मानो और हमारा कहना है
जैसे ही सो कर उठो तुरंत भगवान का नाम लेना प्रारंभ कर दो ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम राम-राम राम-राम राम-राम राम-राम राम-राम राम-राम राम-राम राम-राम राम-राम इसका खूब अभ्यास डालो
इधर उधर से मन को हटाओ हां जो तुम्हारा पुराना संस्कार है ना तो तुम्हारे गांव की तुम्हारे बेटे की तुम्हारे पत्नी की याद तुम्हें आएगी उसको तुम हटाओ समझ गए उसको तुम्हें भूलाना है जब जब तुम्हें याद आवे तब तब उसे भूलाते जाओ इधर भगवान की तरफ लगाते जाओ गुरु बाबा मिल गए तो एक प्रकार से साधक अपना मन गुरु बाबा को दे दिया है शिष्य का मतलब है कि हमने अपना मन महाराज जी को दे दिया अब यह मन हमारा ना रहा
अब जो गुरु बाबा कहै वह करें ठीक है समझ रहे हो ना तुम अपना मन का कहना ना करो अब यह मन हमारा हो गया ना अब हम जो कहेंगे वह तुम्हें करना पड़ेगा |अभी  तुम लोगों का मन हमारा हो गया अब हम जो कहेंगे जो सेवा बताएंगे वह तुम लोगों को करना पड़ेगा
  सेवा करना है भजन करना है  , शरीर के पाप सेवा से  मन के पाप भजन से कट जाएंगे । जब एकात बैठे हो तो कभी घर की याद आने लगे लड़कियों की याद आने लगे तो उन सबके साथ में रहे हैं आखिर उनकी याद हमें क्यों आ रही है क्या बात है क्योंकि हम उनके साथ रहे हैं उनके संस्कार हैं उसी दुश्मन को खत्म करना है जैसे ही याद आ जाए कि महाराज जी ने क्या बताया है कि उधर मन ना जाने पाए इसलिए तुरंत सावधान हो जाओ मन को लगा दो भजन में ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम उसी समय लिखने में लगा दो ओम ओम ओम ओम ओम सेवा में लगा दो सेवा करना भजन करना है

     भजन जब हम राम राम ओम ऊं जपेंगे तो वह वायुमंडल में चला जाएगा आकाश में चला जाएगा जहां राम का स्वरूप होगा उसे वह पकड़े पकड़ेगा जब तुम जपोगे राम राम गए थे वह राम को बुला देगा। 
  अगर 50000000  (5  करोड़) नाम लिया जाए तो अनहद द्वार खुल जाएगा हम लोगों ने लिया है और करके देखा है तुम लोगों को भी करना है, तुम लोगों के मन में आता है ना कि महाराज जी की शरण में आए हैं और महाराज जी कुछ बताते बताते नहीं हैं, सेवा करना शरीर का काम है मन का काम है भगवान का नाम लेना ओम ओम ओम ओम
  सब की आज्ञा पालन करना नाराज मत होना जब तुमको घर की याद आएगी याद मत करो हमको देखो हमारे स्वरूप को देखो हमें हृदय में बैठा लो हमारा ध्यान करो समझ में आ रहा है जैसे फोटो है ना देख रहे हो ना ऐसे देखते देखते आंखें बंद ना हो देखते देखते खूब देखो देखना है धीरे-धीरे वह फोटो अंदर आ जाएगा फिर देखते-देखते आंखे बंद करो फिर इधर से उधर देखो जिधर ध्यान में अभ्यास करो ठीक है यहां सब ठीक है|




स्वामी जी के उपदेश से संकलित



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