Thursday, July 5, 2018

मेरा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में योग का सफ़र।

मेरी योग में रूचि काफी बचपन से ही थी। BHU मे मैंने योग में सर्टिफिकेट हासिल की जो की एक माह का था। यह सन 2014 या 2015 की बात है। अगस्त सितम्बर माह का बैच था। वहा पर दो योग प्रशिक्षक थे ।
पहले डॉ योगेश भट्ट जी, दूसरे त्रिपाठी गुरूजी थे पूरा नाम तो भूल चूका हूँ।
     दोनों शिक्षक लाजवाब थे। भट्ट जी काफी विद्वान थे । उन्होंने कैवल्यधाम योग संस्थान , पुणे से योग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया था। भट्ट सर की वाणी में काफी दम था। वे काफी साधारण ढंग से रहते थे। लेकिन जब बोलते थे तो स्टूडेंट काफी उत्साह से भर जाते थे। एक महीने का समय काफी रोचक था।
  उन्होंने हम लोगो को स्वास्थ्य प्रबंधन सिखाया । आसन प्राणायाम तथा दिनचर्या को नियमित रखने के बारे में बताया।
  हे भाई । त्रिपाठी सर तो नहीं भूलते । वे कक्षा के समापन पर ऐसा भजन कीर्तन करवा देते थे की मन में एक अलग ही उत्साह आ जाता था।

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