Thursday, July 5, 2018

श्री श्री 1008 स्वामी नारायणानंद जी सत्संगी महाराज लंगडू बाबा

सत्संगी महाराज जी का जीवन पूज्य स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी के मुखारविंद से निःसृत वाणी पर आधारित है।

ॐ जय गुरुदेवम् जय गुरुदेव ,
ॐ असरन सरन प्रभु लेवम्।

पूरब में बड़े अच्छे महापुरुष होते आये है।
गोरखपुर नेपाल की तलहटी में जहाँ बुद्ध महावीर जन्मे,  वही पाली एक गाँव है। वहीँ सत्संगी महाराज जी का जन्म हुआ।
  सत्संगी महाराज कुर्मी क्षत्रिय परिवार मे पैदा हुए। एक जमीदार के लड़के थे । 700 बीघा जमीन थी।

एकलौते थे। बड़े जमीदार होते हुए भी पिताजी पूजा भजन अभिषेक में मस्त रहते थे। छः घर अहीर सेवा करे । जो कुछ हो उसी में संतुष्ट हो कर रहते थे । कभी खेत क्यारी जाते ही नही थे।
  सत्संगी महाराज 16 साल के हो गए। इतना खेत होते हुए भी खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। पडरौना कुर्मी लोगो की एस्टेट है।
  जमीदार साहब अपने सेवको से कहे की पता करो भाई अहिरो से तो अहीर कहे की मालिक आज पूरब गए थे तो पश्चिम में खा गई। भैंसे खा जरूर जाय। आस्ते आस्ते सबको पता चल गया की किसकी भैस कहती है। वही अहीर सब अपनी भैंसे हला कर खेत चरा देते थे। एक दिन सत्संगी बाबा (१६) कहे की एक बार दिखा तो दे की किसकी भैंसे चरती है।

अहीर सब उन्ही की नौकरी भी करें औऱ खेत भी चरवा दे।

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